बच्चे को खेलने दें बाहर, होंगे इतने सारे फायदे
बड़े लोग जितना समय अपने वर्कप्लेस पर बिताते हैं, उतना ही समय बच्चों को स्कूल में गुजारना होता है। स्कूल से आने के बाद उनको होमवर्क भी करना पड़ता है। इससे उनको ज्यादा से ज्यादा सीखने का मौका मिलता है। इसके साथ ही उनको खेलना भी जरूरी है। जितना समय वह अकेले बिताते हैं, उसमें दुनिया की उतनी ही ज्यादा समझ विकसित होती है और वे सीखते हैं कि संसाधनों का इस्तेमाल कैसे किया जाए। बच्चों को ज्यादा नियंत्रण में रखने से उनके व्यक्तित्व में निखार नहीं आ पाता है। इसलिए बच्चे को अगर बाहर खेलने देते हैं तो इससे कई फायदे होते हैं। आइये आज जानते हैं बच्चे को बाहर खेलने से उनके व्यक्तित्व पर क्या असर पड़ता है...
लैंग्वेज स्किल्स में सुधार
जब बच्चे बाहर खेल रहे होते हैं तो उनके बोलने पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है। वे आपस में एक दूसरे से बातचीत करते हैं, अपने विचार साझा करते हैं। वहां वे खुलकर बोलते हैं और एक-दूसरे से कुछ सीखने का मौका मिलता है। वहां वे कुछ कल्पना करने के लिए भी आजाद होते हैं। इससे बच्चों के लैंग्वेज स्किल में सुधार आता है।
बेहतर स्वास्थ्य
घर के अंदर घंटों बैठे रहने की तुलना में बच्चे का बाहर रहना काफी फायदेमंद होता है। बाहर उनको खुली धूप मिलती है और ताजा हवा, जो सेहतमंद रहने के लिए जरूरी है। इसके अलावा उनको बाहर दौड़ने का मौका भी मिलता है। इससे बच्चों की अतिरिक्त ऊर्जा कम होती है और वे सेहतमंद होते हैं। उनकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
तनाव से छुटकारा
बड़े लोग तो तनाव से छुटकारा और प्रॉडक्टिविटी बढ़ाने के लिए छुट्टी ले लेते हैं और वैकेशंस पर चले जाते हैं। स्कूल में घंटों बैठे रहने के बाद उनको भी तनाव को कम करने की जरूरत है। खेलने से उनको बेहतर महसूस होता है।
समस्या हल करने की क्षमता
जब बच्चे बाहर खेलते हैं तो वे अपना खुद का नियम बनाते हैं। खेल के दौरान किसी तरह की समस्या होने पर, उसका हल वे खुद तलाशते हैं। इससे वास्तविक जीवन में भी समस्याओं को हल करने की क्षमता उनके अंदर विकसित होती है। इस तरह बाहर खेलने से सोचने-समझने, फैसला लेने और चुनौतियों का सामना करने की योग्यता भी उनके अंदर विकसित होती है।
लीडरशिप और सामाजिक जागरूकता का विकास
बाहर बच्चे जब टीम बनाकर खेलते हैं तो उनके अंदर लीडरशिप का गुण विकसित होता है। इससे उनके अंदर टीम भावना भी पैदा होता है। साथ ही घर से बाहर रहने पर उनके अंदर सामाजिक विषयों को लेकर जागरूकता भी पैदा होती है। जब बच्चा घर से बाहर रहता है तो तरह-तरह की समस्याओं से उसका सामना होता है, जिससे उसकी समझ बढ़ती है।
फोकस बढ़ता है
जब बच्चे बाहर निकलते हैं तो उनको खुली धूप में घूमने का मौका मिलता है। उससे उनके अंदर डोपमिन तैयार होता है। डोपमिन एक न्यूरोट्रांसमिटर है जो पॉजिटिव अहसास को बढ़ाता है। बाहर खेलने के बाद अच्छी नींद आती है। इस सबका फायदा यह होता है कि बच्चों के अंदर पढ़ाई और दूसरे काम के लिए फोकस बढ़ता है।
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