मेडिकल ही नहीं, इन फील्ड्स में भी है खूब मौका
लंबे समय से बायॉलजी में ग्रैजुएशन करने वाले स्टूडेंट्स ट्रेडिशनल सोच तक खुद को सीमित करके चलते रहे हैं। लेकिन अब दुनिया बदल चुकी है। साइंस के क्षेत्र में नए प्रफेशनल कोर्स ने सोच को बदल दिया है। आज अवसरों की कमी नहीं है। आप पैरामेडिकल और बायोटेक्नॉलजी को करियर विकल्प के रूप में अपना सकते हैं।
पैरामेडिकल पर्सनल और बायॉटेक्नॉजिस्ट की कमी
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की सिफारिशों के अनुसार, एक हजार लोगों की आबादी के बीच में कम से कम एक योग्य डॉक्टर होना ही चाहिए। यही नहीं, हर एक डॉक्टर के भीतर पैरामेडिकल और बायोटेक्नॉलजी स्किल भी होनी चाहिए। इनकी सिफारिशों पर गौर करें तो, भारत में आबादी का आंकड़ा एक अरब को पार कर चुका है। ऐसे में अपने यहां कम से कम 12 लाख डॉक्टर्स और 96 लाख पैरामेडिकल पर्सनल और बायॉटेक्नॉलजिस्ट होने ही चाहिए। तब जाकर हम अपनी मेडिकल सुविधाओं को सही तरीके से चला सकेंगे। 12 वीं के बाद आज भी कई यूथ एक अच्छे डॉक्टर बनने का सपना लिए इस फील्ड में आते हैं और सफलता भी हासिल करते हैं। यहां पर करियर ऑप्शन के रूप में स्टूडेंट्स को नर्सिंग, ऑप्टोमेट्री, फार्मेसी, फिजियोथेरपी से लेकर आनुवांशिक अनुसंधान जैसे विकल्प मिलते हैं। यही कारण है कि बायॉलजी के स्टूडेंट्स इस ओर अपना इंटरेस्ट शो करते हैं। आज के दौर में स्टूडेंट्स के बीच में पैरामेडिकल और बायॉटेक्नॉलजी का कोर्स काफी पाप्युलर हो चला है।
पैरामेडिकल साइंस
पैरामेडिकल सांइस की स्टडी करने के बाद आपका करियर इंडिया में सेफ है। यह हाई सैलरी के साथ ही एक्सपोजर भी देता है। इसके जरिए आप दुनिया के दूसरे देशों में भी काम कर सकते हैं। आज इस फील्ड में योग्य प्रफेशनल्स की कमी नहीं है। अपने यहां कई एक ऐसे इंस्टिट्यूट्स हैं, जो इस कोर्स को सफलता पूर्वक संचालित कर रहे हैं। इंस्टिट्यूट्स इस कोर्स के जरिए योग्य डेंटल टेक्निशन, साइकोथेरपिटस्ट, एक्स-रे और एमआरआई एक्सपर्ट, नर्स, तैयार कर रहे हैं। खास बात यह है कि ये प्रफेशनल्स बिना किसी को दिखाए अपना काम बेहतरीन तरीके से करते हैं। हमारे जीवन को सुरक्षा देते हैं।
बायॉटेक्नॉलजी साइंस
बायो और टेक्नॉलजी के फ्यूजन से बनी बायॉटेक स्ट्रीम पूरी तरह रिसर्च बेस्ड है। आने वाले समय में अनेक फील्ड्स में इसके एक्सपर्ट्स की भारी डिमांड रहने की उम्मीद है। ऐसे में इससे रिलेटेड कोर्स कर अपने फ्यूचर को संवारा जा सकता है। बायॉटेक्नॉलजी में करियर बनाने के लिए एक स्टूडेंट्स को बायॉलजी, केमेस्ट्री और लाइफ साइंस के बारे में डीप स्टडी करनी होती है। आमतौर पर बायॉटेक्नॉलजी में प्रवेश पोस्ट ग्रैजुएट लेवल पर होता है। हालांकि देश में कई एक कॉलेज ऐसे भी है, जो ग्रैजुएट लेवल पर यह कोर्स कराते हैं। जिस किसी का बैक ग्राउंड ग्रैजुएशन में फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायोलॉजी हो, इस कोर्स के लिए अप्लाई कर सकता है। हालांकि अगर ऐग्रिकच्लरल साइंस में आपकी पकड़ मजबूत है,तो यहां पर आपको इसका फायदा मिल सकता है। देश भर के सारे आईआईटी इंस्टिट्यूट्स में बायॉटेक कोर्स कराए जाते हैं। यहां से बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल की जा सकती है।
पैरामेडिकल में जॉब के अवसर
फाइजर, डॉ बत्रा और रैनबैक्सी जैसी कंपनियां पैरामेडिकल सेंटर्स की स्थापना कर रही हैं। वहीं, रॉश, लैब इंडिया और दूसरी कंपनियां पैरामेडिकल एक्सपर्ट को खुद के साथ जोड़ रही हैं। एक लोकप्रिय ब्रैंड के साथ काम करने वाले सुधाकर मिश्र कहते हैं कि बाजार में जिस तरीके से कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है, उसे हिसाब से प्रफेशनल्स की डिमांड और भी ज्यादा बढ़ने वाली है।
बायॉटेक्नॉलजी में अवसर
एमिटी यूनिवर्सिटी में बायॉटेक्नॉलजी के प्रफसर राजीव साहू कहते हैं कि इस फील्ड को सिर्फ जॉब सर्च के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। बल्कि यहां पर रिसर्च और नॉलेज को भी देखने की जरूरत है। साइंस में उन्नति और नई टेक्नॉलजी के साथ कोर्स और स्टूडेंट्स को यहां करने के लिए काफी कुछ है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि बायॉटेक्नॉलजी में भी जॉब के अच्छे अवसर हैं। एमबीबीएस की स्टडी करने के बाद न्यूजीलैंड से बायॉटेक्नॉलजी का कोर्स करने वाली स्रुति के लिए इसके मायने अलग हैं। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद फिजिशन बनने के बजाय जेनिटिक रिसर्च करना सही समझा। आप भी कुछ नया करने के मूड में हैं, तो ये कोर्स आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
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